दूसरी लहर में 300 मौतें इन्हीं के कारण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया था नोटिस
रायपुर। छत्तीसगढ़ में तीसरी लहर में कोरोना मौतों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। दूसरी लहर में सरकारी तौर पर कोविड से 13 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं। डेथ ऑडिट कमेटी ने एक-एक मौत की पड़ताल के बाद खुलासा किया कि 300 से ज्यादा लोगों की कोविड से मौतें सिर्फ इसलिए हुईं कि वे झोलाछाप डाक्टरों से इलाज करवा रहे थे। इस खुलासे के बाद प्रदेश के लगभग सभी जिलों में ऐसे डाक्टरों को नोटिस जारी किए गए हैं। तीसरी लहर में भी यह प्रवृत्ति बदली नहीं बदल रही है। तीसरी लहर में हुई सौ मौतों की डेथ ऑडिट में कमेटी ने फिर खुलासा किया कि कम से कम छह लोगों की जान झोलाछाप डाक्टरों के इलाज के कारण गई है।

कमेटी ने संबंधित सीएमएचओ को इन डाक्टरों को नोटिस जारी करने की अनुशंसा कर दी है, जिसमें से कुछ को गलत इलाज का दोषी ठहराते हुए नोटिस जारी भी कर दिए गए हैं। तीसरी लहर में मौतों की संख्या अब भी कम है (दिसंबर में केवल 7 और जनवरी में अब तक 98)। इसके बावजूद डेथ आडिट कमेटी ने मौतों के कारणों की बारीकी से पड़ताल शुरू कर दी है। इसके बाद ही आधा दर्जन से अधिक मामलों में झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस थमाने की अनुशंसा की गई है।
प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में कोरोना का इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों पर संबंधित जिलों के सीएमओ को एक्शन लेने के लिए कहा गया है। दरअसल, कोरोना डेथ की रोजाना ऑडिट के बाद जो भी कारण सामने आता है, संबंधित जिले के सीएमओ को टेलीफोन के जरिए उस संबंध में नोटिस जारी करने के लिए कहा जाता है। इसी के बाद सीएमओ दफ्तर से नर्सिंग होम एक्ट के तहत ऐसे डॉक्टरों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
सीएम भूपेश बघेल ने दूसरी लहर में मई में लिया था इस पर संज्ञान
पिछले साल दूसरी लहर के पीक के दौरान सीएम भूपेश बघेल ने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के साथ 7 मई को हुई बैठक में ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा किए जा रहे कोरोना इलाज को लेकर गहरी चिंता जताई थी। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बैठक में उन्हें बताया था कि झोलाछाप इलाज के कारण मरीज बहुत अधिक गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं। उसके बाद अस्पताल आने के बाद उनका सर्वाइव करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। इस पर सीएम ने ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त एक्शन के लिए कहा था।
तीसरी लहर के पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने रेफरल यूनिट को मजबूत कर, झोलाछाप डॉक्टरों से मरीजों को बचाने के लिए रणनीति बनाई थी। प्रदेश में दूसरी लहर के दौरान कोरोना का झोलाछाप इलाज कर मरीजों की जान से खेलने वाले 300 से ज्यादा डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए थे। तीसरी लहर के दौरान हाल में ऐसी आधा दर्जन मौतों का पता चला, जिसमें झोलाछाप डाक्टरों के इलाज के कारण मरीज गंभीर हो गया।
डेथ ऑडिट कमेटी ने ऐसी ही मौतों के मामले में झोलाछाप डाक्टरों को नोटिस जारी करने की अनुशंसा की है। हालांकि डेथ आडिट में ये भी पता चला है कि लोग दूसरी लहर की तरह ही फिर गैरजरूरी दवाई खा रहे हैं और जब तक हालात गंभीर नहीं हो जाते, अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं।
दूसरी लहर में कई नोटिस
भास्कर ने पूरे मामले की पड़ताल के लिए विभिन्न जिलों के सीएमओ से भी बात की कोंडागांव के तत्कालीन सीएमएओ डॉ. आरके सिंह के मुताबिक दूसरी लहर में उन्होंने कोंडागांव में कोविड का इलाज कर रहे 50 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टरों पर एक्शन करते हुए नोटिस जारी किया था। दुर्ग सीएमओ डॉ. गंभीर सिंह का कहना है कि हाल ही में डेथ आडिट कमेटी ने मौत के एक मामले में झोलाछाप डॉक्टर को नोटिस जारी करने के लिए कहा है। दिसंबर के महीने में भी एक झोलाछाप को नोटिस जारी किया है।
दूसरी लहर में 300 नोटिस दिए गए, लेकिन वही गलती दोहराई
प्रदेश में दूसरी लहर के दौरान कोरोना का झोलाछाप इलाज कर मरीजों की जान से खेलने वाले 300 से ज्यादा डॉक्टरों को नोटिस जारी किए गए थे। तीसरी लहर के दौरान हाल में ऐसी आधा दर्जन मौतों का पता चला, जिसमें झोलाछाप डाक्टरों के इलाज के कारण मरीज गंभीर हो गया। डेथ ऑडिट कमेटी ने ऐसी ही मौतों के मामले में झोलाछाप डाक्टरों को नोटिस जारी करने की अनुशंसा की है। हालांकि डेथ आडिट में ये भी पता चला है कि लोग दूसरी लहर की तरह ही फिर गैरजरूरी दवाई खा रहे हैं और जब तक हालात गंभीर नहीं हो जाते, अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं।
तीसरी लहर के दौरान भी इस तरह के केस सामने आए
युवक की मौत पर नोटिस इसी माह कोरोना से 23 साल के एक युवक की मौत हो गई। राज्य स्तरीय डेथ आडिट कमेटी की पड़ताल में पता चला कि उसका इलाज झोलाछाप डॉक्टर कर रहा था। उसने युवक को गैरजरूरी दवाएं दीं, जिनसे वह गंभीर स्थिति में पहुंच गया। डॉक्टर को नोटिस दे रहे हैं।
एमबीबीएस ने की गड़बड़ी – 52 साल के एक शख्स की मौत के बाद यहीं के एक एमबीबीएस डॉक्टर को नोटिस जारी किया जा रहा है। डॉक्टर ने डायबिटीज के मरीज को स्टेरॉयड दिया था। इससे अचानक शुगर लेवल बढ़ा और हालत बिगड़ गई। नोटिस की सिफारिश डेथ ऑडिट कमेटी ने की थी।
झोलाछाप के इलाज से मौत – 45 साल के व्यक्ति की दूसरी लहर में अप्रैल में मौत हो गई थी। परिवार के अनुसार गांव का ही एक बिना डिग्री डॉक्टर निमोनिया बताकर इलाज करता रहा। इससे हालत बिगड़ी और रायपुर के अस्पताल में भर्ती करने के बाद भी इस व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।
ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी झोलाछाप ने ली जान
भास्कर की पड़ताल में पता चला कि प्रदेश में दूसरी लहर के दौरान ही 17 हजार से अधिक मौतें हो चुकी थी। स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा 13 हजार से अधिक का था, लेकिन 17 हजार लोगों को मुआवजा बंटने के बाद 4 हजार और मौतों का सच भी सामने आ गया। इन मौतों की पहले रिपोर्ट नहीं हुई थी। आंकड़ा बढ़ा, तब इन मौतों की भी डेथ ऑडिट की गई। इसी में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज का फैक्टर सामने आया। इतना ही नहीं, कोरोना के दौरान केवल ग्रामीण इलाकों में ही नहीं, रायपुर जैसे शहरी इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरी की वजह से कई मरीजों की जानें गई।
कई जिलों को नोटिस जारी करने की सिफारिश
दूसरी लहर में हुई कई मौतों में डेथ आडिट कमेटी ने सीएमओ को नोटिस जारी करने के लिए कहा था। अभी जांजगीर रायपुर दुर्ग समेत कुछ जिलों में नोटिस जारी करने के लिए सिफारिश की गई है। -डॉ. ओपी सुंदरानी, सदस्य, डेथ आडिट कमेटी
प्राइवेट अस्पतालों को भी नोटिस जारी किया
दूसरी लहर के दौरान झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस जारी कर सख्त एक्शन लिया गया था। इतना ही नहीं, गैर जरूरी दवाएं और प्लाजमा जैसा इलाज देने वाले प्राइवेट अस्पतालों को भी नोटिस जारी किए हैं। -डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ, रायपुर