बाबा रामदेव मंदिर में चल रही देवी भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा –
महिषासुर और शुंभ-निशुंभ जैसे असुर हमारे भीतर की बुरी प्रवृत्तियों और अहंकार के प्रतीक हैं, जिन्हें मां की कृपा से ही जीता जा सकता है – राजीव कृष्ण महाराज
दुर्ग दबंग प्रहरी समाचार ) – भगवान द्वारकाधीश श्री कृष्ण के अवतार बाबा रामदेव जी की दुर्ग में एक मात्र मंदिर बाबा रामदेव मंदिर गंजपारा में दिनांक 12 से 22 सितम्बर तक बाबा रामदेव जी के जन्मोत्सव के अवसर पर विभिन्न धार्मिक आयोजनों में श्री देवी महात्म्य कथा का आयोजन किया गया है
मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज राठी ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दुर्ग में बाबा रामदेव जी का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है जिसमें प्रसिद्ध गायकों के द्वारा भजन के आयोजन के साथ साथ प्रसिद्ध कथा वाचक गोवत्स पंडित राजीव कृष्ण महाराज धुलिया महाराष्ट्र के श्रीमुख से श्री देवी माहत्म्य कथा का आयोजन किया गया है, कथा दिनांक 13 से 19 सितम्बर तक प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से श्री बाबा रामदेव मंदिर गंजपारा में आयोजित की गई है.
देवी माहात्म्य कथा (दुर्गा सप्तशती) में राजीव कृष्य जी ने ज्ञान और भक्ति का सुंदर संदेश देते हुए बताया है कि भगवती आदिशक्ति का चरित्र केवल बुराई का नाश नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार, काम, क्रोध और अज्ञान रूपी राक्षसों का अंत करने का मार्ग है।
श्री देवी महात्म्य का संदेश अंहकार का विनाश – महिषासुर और शुंभ-निशुंभ जैसे असुर हमारे भीतर की बुरी प्रवृत्तियों और अहंकार के प्रतीक हैं, जिन्हें मां की कृपा से ही जीता जा सकता है।
ज्ञान की प्राप्ति: यह पवित्र ग्रंथ हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान और विवेक की ओर ले जाता है।
राजीव कृष्ण जी ने बताया कि देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में मेधा ऋषि ने राजा सुरथ और समाधि वैश्य को अज्ञान और मोह से मुक्ति का जो मार्ग दिखाया, वह सनातन धर्म के सबसे सुंदर उपदेशों में से एक है। राजीव कृष्ण महाराज का यह संदेश हमें सच्चे ज्ञान (आत्मज्ञान) की परिभाषा सिखाता है।
देवी महात्म्य के अनुसार, ‘ज्ञान’ के विषय में निम्नलिखित सुंदर संदेश दिया गया है:
1. सांसारिक ज्ञान बनाम वास्तविक ज्ञान
ऋषि मेधा कहते हैं कि संसार के सभी प्राणियों को अपनी इंद्रियों के अनुकूल विषयों का ज्ञान होता है। पशु-पक्षी भी जानते हैं कि पेट कैसे भरना है और डर से कैसे भागना है। लेकिन यह केवल इंद्रिय जनित ज्ञान है, जो इंसानों और जानवरों में एक समान है। वास्तविक ज्ञान वह है जो हमें इस दृश्य जगत (माया) के पार देखना सिखाए।
2. महामाया का प्रभाव और अज्ञान
संसार में जो कुछ भी है, वह भगवती महामाया की इच्छा से है। बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी उनके प्रभाव में आकर मोह-माया के जाल में फंस जाता है। आचार्य संदेश देते हैं कि जब तक मनुष्य धन, परिवार और शरीर को ही अपना सर्वस्व मानता है, तब तक वह अज्ञान (मोह) के अंधकार में रहता है।
3. विवेक और वैराग्य ही सच्चा ज्ञान है
सच्चा ‘ज्ञान’ शब्द तब सार्थक होता है जब मनुष्य के भीतर विवेक और वैराग्य जागृत हो।
विवेक: यह समझने की शक्ति कि क्या नश्वर है और क्या शाश्वत।
वैराग्य: संसार में रहते हुए भी उसके मोह और अहंकार से मुक्त रहना।
4. ज्ञान का अंतिम संदेश: शरणागति
आचार्य का सबसे सुंदर संदेश यह है कि इस अज्ञान रूपी भवसागर से पार पाने का एकमात्र उपाय भगवती आद्याशक्ति की शरण में जाना है। जब मनुष्य अपना अहंकार छोड़कर उस परम शक्ति को पहचान लेता है, तभी उसे सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है, जो मोक्ष का कारण बनता है।
आज की कथा में रायपुर शदाणी दरबार से आसनदास मोहनानी ईश्वर पंजाबी सेवक राम खत्री राजु पाहुजा सुरेश हासवानी पुष्प शदाणी राम बख्तियार जी ने कथा वाचक राजीव कृष्ण जी का सम्मान किया गया एवं आयोजक समिति द्वारा रायपुर शदाणी दरबार से आए हुए सभी सदस्यों का सम्मान किया किया।

