किसानों की 9 सूत्रीय मांगों पर कांग्रेस का आर-पार का ऐलान, 9 जून को बैलगाड़ी और पदयात्रा से होगा कलेक्ट्रेट का घेराव
बिलासपुर ( दबंग प्रहरी समाचार )। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही अन्नदाताओं को आ रही गंभीर व्यावहारिक दिक्कतों, सोसायटियों में खाद-बीज की किल्लत और पेट्रोल पंपों पर थोपे गए कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के विरोध में सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण एवं जिला किसान कांग्रेस (शहरी व ग्रामीण) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में सुबह 11:00 बजे एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। जिला अध्यक्ष श्री महेंद्र गंगोत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ ‘आर-पार’ की लड़ाई का शंखनाद करते हुए आगामी 9 जून 2026 को बिलासपुर कलेक्ट्रेट के ऐतिहासिक घेराव का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

बैठक में तय रणनीति के अनुसार, छत्तीसगढ़ के किसानों की जलती हुई 9 सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी 9 जून को सुबह 11:00 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल और अभूतपूर्व पदयात्रा निकाली जाएगी। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह होगी कि किसान और कांग्रेस के दिग्गज नेता पारंपरिक तरीके से बैलगाड़ियों पर सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। कांग्रेस नेताओं ने अपने साझा बयान में दो टूक कहा कि वर्तमान में सोसायटियों और ग्रामीण पेट्रोल पंपों पर कड़े और अव्यावहारिक प्रशासनिक नियम थोपकर किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को एक कड़ा ज्ञापन सौंपकर इन नियमों को तुरंत शिथिल करने की मांग की जाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में बिलासपुर और संभाग के तमाम दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने शिरकत की। बैठक में मुख्य रूप से कोटा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक सियाराम कौशिक, छाया विधायक राजेंद्र साहू, विजय केसरवानी, राजेंद्र शुक्ला, पूर्व महापौर रामशरण यादव, प्रमोद नायक और आत्मजीत मक्कड़ विशेष रूप से उपस्थित रहे। संगठन व किसान कांग्रेस की ओर से नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी महामंत्री (संगठन) अकील हुसैन, प्रदेश उपाध्यक्ष विनय शुक्ला, ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतोष बघेल और शहर अध्यक्ष योगेश यादव ने मोर्चा संभाला। इनके साथ ही नीरज सोनी, अरुण त्रिवेदी, सुभाष अग्रवाल समेत दर्जनों पदाधिकारियों और सभी ब्लॉक व अनुमंडल अध्यक्षों ने कलेक्ट्रेट घेराव को ऐतिहासिक बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रभारियों की नियुक्तियां कीं।
इन 6 प्रमुख मांगों को लेकर कांग्रेस ने खोला है मोर्चा:
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खाद कटौती का ‘तुगलकी फरमान’ वापस हो: खरीफ सीजन के ऐन वक्त पर प्रति एकड़ मात्र 1 बोरी खाद की पात्रता का सरकारी नियम पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इसे तत्काल निरस्त कर किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त खाद दी जाए।
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तीन किस्तों की नीति और टोकन व्यवस्था बंद हो: 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन अलग-अलग किश्तों में खाद देने का नियम बंद कर सभी को एकमुश्त खाद मिले और ‘सुपर फ्लॉप’ साबित हो चुकी टोकन व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए।
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खाद-बीज पर से प्रशासनिक नियंत्रण हटे: खाद की वास्तविक मात्रा का सही आकलन केवल खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही कर सकता है, न कि वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी। अतः सोसायटियों से खाद-बीज उठाने पर लगाया गया कड़ा नियंत्रण तत्काल हटना चाहिए।
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‘जरकिन’ (कैन) में डीजल देने पर लगी पाबंदी हटे: ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर किसानों को मात्र ₹1,000 का डीजल देने और भारी-भरकम ट्रैक्टर को स्वयं पंप तक लाना अनिवार्य करना सरासर अन्याय है। किसानों को पूर्व की भांति जरकिन (कैन/डब्बों) में डीजल की सुलभ आपूर्ति की अनुमति दी जाए।
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अघोषित बिजली कटौती बंद हो, कृषि बिजली मुफ्त हो: ग्रामीण अंचलों में घंटों होने वाली अघोषित बिजली कटौती से खेतों की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। कृषि पंपों के लिए बिजली को पूर्णतः मुफ्त किया जाए और हाल ही में बढ़ाई गई दरें वापस ली जाएं।
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खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगे: खाद के कृत्रिम संकट का लाभ उठाकर खुले बाजार में हो रही जमाखोरी पर तत्काल रोक लगाई जाए, निजी मुनाफाखोर दुकानदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और पूरे प्रदेश में खाद की एक समान पारदर्शी दर लागू की जाए।
इस बैठक के बाद बिलासपुर ग्रामीण और शहरी इलाकों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर किसानों को 9 जून के कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होने के लिए लामबंद करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों के मुद्दे पर यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती बनने वाला है।