रायपुर |छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले 30 दिनों से मितानिन धरना दे रही थीं। शनिवार शाम इन्होंने अपने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया। दरअसल एक दिन पहले ही इन महिलाओं की मुलाकात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हुई थी। मुख्यमंत्री ने मितानिन महिलाओं की मांगों को सुनकर उन्हें जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

छत्तीसगढ़ की सरकार ने जुलाई के महीने में मितानिनों की मांग पूरा करने का आश्वासन दिया है। मितानिनों के संगठन की प्रमुख सरोज सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि सरकार से मिले आश्वासन के बाद आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया है। अगर जुलाई तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो एक बार फिर से छत्तीसगढ़ की मितानिने धरने पर बैठेंगी।
आंदोलन की आग पर कुल्फी की ठंडक
30 दिनों से राजधानी रायपुर में धरना दे रही मितानिन को संसदीय सचिव यू डी मिंज, और गुलाब कमरो ने धरना स्थल पहुंचकर समझाया। करीब 2 घंटे तक वह मितानिन महिलाओं को समझाने का प्रयास करते रहे। मगर सभी महिलाएं लिखित आश्वासन दिए जाने की बात पर अड़ी हुई थी। काफी देर तक समझाइश देने के बाद आखिरकार मितानिन आंदोलन को स्थगित करने पर राजी हुईं। संसदीय सचिवों ने कहा कि सरकार के कहने पर ही हम आपके पास आए हैं और हमारी बातों पर भरोसा कीजिए । इसके बाद नेताओं ने महिलाओं को कुल्फी खिलाई और आंदोलन खत्म कराया।
इन मांगों के लिए जारी थी जंग
- मितानिन संघ का मांग है कि उनको दिए जाने वाले राज्य अंश 75 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी किया जाए।
- चुनाव पूर्व जन घोषणा पत्र में मितानिन टीम को प्रोत्साहन राशि के अतिरिक्त राशि प्रति माह पांच हजार रुपए दिया जाए।
- मितानिन को उनके निर्धारित कार्य, जिसमें राशि मिलती है, उसके अतिरिक्त अन्य सभी कार्य करती है, उसमें भी राशि दी जाए।
- मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, ब्लाक समन्वयक, स्वस्थ्य पंचायत समन्वयक, एरिया कॉर्डिनेटर, हेल्प डेस्क फेसिलेटर का मासिक भविष्यनिधि राशि जमा की जाए।
- मितानिन की मृत्यु हो जाती है या काम करने में असमर्थ हो तो नया चयन में परिवार वालों को प्राथमिकता दिया जाए।
- बीसीएसपी एसएमटी और मितानिन की शिकायत संबंधी जांच एवं निराकरण बीएमओ द्वारा गाइडलाइन के अनुसार हो।