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रामनगर का बाजार टॉयलेट विहीन

⏰सतना/रामनगर💥टॉयलेट विहीन बाजार,,वसूली में लीन चौकीदार👆🏿 नगर परिषद रामनगर,,भ्र्ष्टाचार पर भ्र्ष्टाचार,जरूरत किनारे,,पाखंडी लम्बरदार, जी हां,नगर परिषद रामनगर जो विगत सालो से प्रशासक जी के अंडर में,विकास का परचम लहरा रहा है,विकास का आलम यह है कि थाना,चौक, सतना कैम्प,या बाजार में कही भी एक टॉयलेट नही है,जिसके चलते यात्री,बच्चे,महिलाएं या बुजुर्गों के लिए कही प्रशाधन की व्यवस्था नही है,समग्र स्वच्छता का तमगा लिए नगर परिषद के व्यापारी व जनता इधर,उधर,खुले में प्रशाधन करते देखे जा सकते है,नगर परिषद का आम जनता की समस्यायों से कोई लेना देना नही है,उन्हें तो सिर्फ व सिर्फ बैठकी वसूलने से फुरसत नही है,जिसके चलते स्थिति विकराल है,और तो और प्याऊ के नाम पर म्याऊँ-म्याऊँ ही चल रहा है,नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ जो लकदक गाड़ियों के शौकीन है,खबर के अनुसार रामनगर में रहते हुए भरपूर कमाई में व्यस्त है,जिसके चलते इन दिनों खुद की चार पहिया मेंटेन कर रहे है,अब हालात यह है कि जो जनरेटर जिसकी ऑन लाइन कीमत 100 ,125 केव्ही की 7 से 10 लाख रुपये दिखती है उसे 15-17 लाख में खरीदा गया है,जिसकी जानकारी भी नही दी जा रही है,सूचना का अधिकार अधिनियम इनकी जेब मे है,जिसे चाहे सूचना दे,जिसे चाहे न दे,जनता का फोन उठाये चाहे न उठाएं,पत्रकारों को किनारे कर दे,मगर अपने निजी चापलूसों के लिए कुछ भी करने का माद्दा रखते है,रही बात नगर परिषद कार्यालय पे उपलब्धता की इससे भी प्रभारी सीएमओ का कोई वास्ता नही दिखता और तो और महीने,दो महीनों में होने वाली शांति,सुरक्षा की बैठकों में भी मजाल क्या आदरणीय का पदार्पण हो जाये,कभी किसी चतुर्थ कर्मचारी को भेजेंगे तो कभी किसी ठेका श्रमिक को,कुल मिला कर व्यवस्था बनाने के लिए जिन्हें बिठाया गया है वह खुद नगर के लिए अव्यवस्था बन चुके है,और जिम्मेवार जन सेवक,जन नायक जिन्हें रबर स्टाम्प चाहिए,कामकाजी स्टाफ नही,जो इनके हुक्मों पर उठे बैठे,और प्रभारी सीएमओ से अच्छा कोई अधिकारी हो ही नही सकता जो,इनकी गुलामी में अपना निजी भविष्य देख कर जनता का वर्तमान व भविष्य चौपट कर रहा है,ऐसे गैर जिम्मेवार अधिकारी को तुरंत मूल पद में भेजते हुए,नगर की कमान किसी पढ़े लिखे सक्षम व जिम्मेवार अधिकारी ,को देना चाहिए जो किसी काम मे वक्त जरूरत के अनुसार खुद की बुद्धि,विवेक का प्रयोग करके , आम जनता ,व्यापारियों की जरूरतों पर भी ध्यान दे,अगर शाशन व प्रशाशन चाहे तो स्थिति सुधर सकती है।

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