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अब बाहर देखने को मिलेगा जंग – सास-बहू, मां-बेटी और भाई-भाई के बीच होगी चुनावी जंग बिहार में 

पटना| बिहार पंचायत चुनाव 2021के पहले चरण का मतदान 24 सितंबर को है. लेकिन, उससे पहले चुनाव से जुड़ी अलग-अलग तस्वीरें भी देखने को मिल रही हैं. एक ओर जहां कई पंचायतों में उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही जीत हासिल कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर चुनाव में सास-बहू, मां-बेटी और भाई-भाई भी एक दूसरे के आमने-सामने हैं. दरअसल इस बार चुनाव के लिए एक ही पंचायत से सास-बहू समेत परिवार के दूसरे सदस्य नामांकन कर रहे हैं. पटना के नौबतपुर प्रखंड के गोनवा पंचायत, सीतामढ़ी के चोरौत प्रखंड की यदुपट्टी पंचायत और चोरौत पूर्वी पंचायत में रिश्तेदार एक-दूसरे के सामने होंगे.

रिश्तों की अनदेखी कर किया  नामांकन दाखिल

 पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड के गोनवा पंचायत की जहां एक बहू घर की दहलीज पार कर नामांकन करने पहुंची. दरअसल इस पंचायत की वर्तमान मुखिया चंद्रावती देवी हैं. लेकिन, इस बार चुनाव के लिए चंद्रावती के साथ-साथ उनकी बहू खुशबू कुमारी ने भी नामांकन भरा है. वहीं दूसरा मामला सीतामढ़ी के चोरौत प्रखंड की यदुपट्टी पंचायत का है, जहां इस बार चुनावी जंग मां-बेटी के बीच होगी. यहां मुखिया पद के लिए शकीला हुसैन और उनकी बेटी अनिशा हुसैन दोनों ने नामांकन दाखिल किया है. अगर बात करें भाई-भाई के बीच मुक़ाबले की तो चुनावों में यह कोई नई बात नहीं है. इस बार चोरौत पूर्वी पंचायत में मुखिया पद के लिए दो भाइयों राम प्रवेश चौधरी और राम नरेश चौधरी के बीच मुकाबला होगा.

जानबूझकर आमने-सामने होते हैं रिश्तेदार
बिहार पंचायत चुनाव में रिश्तेदारों के बीच चुनावी जंग को लेकर बिहार के जाने-माने पत्रकार और लेखक पुष्यमित्र का कहना है कि पंचायत चुनाव की सबसे खास बात यह होती है कि इसमें पूरा गांव भाग लेता है और लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से भी जानते हैं. ऐसे में सभी लोग इस चुनाव का आनंद लेते हैं और हर तरीके से इसमें शामिल होना चाहते हैं. पुष्यमित्र कहते हैं कि कई मामलों में तो उम्मीदवार जान बूझकर परिवार के दूसरे सदस्यों को चुनाव में खड़ा करते हैं क्यों कि बाहरी लोगों से वो मुक़ाबले में जीत सके. ऐसे में एक ही परिवार के दो सदस्यों के चुनाव लड़ने से उस परिवार को लाभ मिलने की संभावना रहती है. वहीं कई मामलों में पारिवारिक सदस्यों के बीच मनमुटाव और वर्चस्व की लड़ाई भी एक कारण होती है, जिस वजह से चुनाव में रिश्तेदार आमने-सामने होते हैं.