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बिना परीक्षा दिये हो गया नर्सिंग में एडमिशन :चिकित्सा संचालनालय ने संज्ञान लेकर किया जाँच शुरू

जीरो परसेंटाइल से प्रवेश के बाद लिया फैसला, ऐसी 1324 सीटों की जांच शुरू

रायपुर [दबंग प्रहरी ] । राज्यभर के निजी नर्सिंग कॉलेजों में 30-31 दिसंबर को हुए एडमिशन जांच के दायरे में आ गए हैं। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि प्राइवेट कॉलेजों ने ऐसे छात्रों को भी प्रवेश दे दिया है जो व्यापमं की ओर से आयोजित नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए थे। आरक्षण विवाद के बाद दिसंबर में हुई काउंसिलिंग में 1324 छात्रों को प्रवेश दिया गया था।

अब इन्हीं एडमिशन की जांच की जा रही है। नर्सिंग छात्रों को राहत देने के लिए जीरो परसेंटाइल वालों को भी एडमिशन देने का फैसला किया गया था। प्राइवेट कॉलेज वालों ने इसी छूट का जमकर फायदा उठाया। ऐसे छात्रों को भी एडमिशन दे दिया गया जो व्यापमं के प्री नर्सिंग टेस्ट में शामिल ही नहीं हुए थे। नियमानुसार उन्हीं जीरो परसेंटाइल छात्रों को एडमिशन मिलना था जो प्री नर्सिंग टेस्ट में शामिल हुए थे।

इस तरह से होगी जांच
डीएमई की ओर से जारी आदेश के अनुसार 6 फरवरी से सभी 133 नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों का सत्यापन किया जाएगा। डीएमई ने सभी सरकारी व निजी कॉलेजों को ई-मेल कर नर्सिंग कोर्स में प्रवेश लेने वालों छात्रों की सूची को सत्यापित कराने के लिए कहा है। सरकारी कॉलेजों की सभी सीटों पर एडमिशन पहले ही हो गया था। इसलिए यह जांच केवल निजी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों की ही होगी। सत्यापन के दौरान कॉलेजों के दो प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। उनके पास प्रवेशित छात्रों की सूची रहेगी। पूरी तरह से जांच होने के बाद सत्यापित सूची में समिति के अध्यक्ष के अलावा दो सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अभाव में सूची सत्यापित नहीं मानी जाएगी।

खाली सीटों को भरने 12वीं पास स्टूडेंट्स को दिया प्रवेश
प्रदेश के 131 निजी नर्सिंग कॉलेजों में बीएससी, एमएससी, पोस्ट बेसिक बीएससी व जीएनम कोर्स में 31 अक्टूबर के बाद 3999 सीटें खाली थीं। 29 दिसंबर को शासन ने जीरो परसेंटाइल के आधार पर एडमिशन देने का फैसला लिया। इसके बाद कॉलेजों के पास केवल 30-31 दिसंबर 2022 को ही एडमिशन देने का समय था। कॉलेजों ने आनन-फानन में प्रवेश दिए ताकि सीटें खाली न रह जाएं। सीटें खाली रहती तो कॉलेजों को आर्थिक नुकसान होता। सीटें भरने के लिए नर्सिंग टेस्ट में शामिल होने वाले छात्रों के बजाय 12वीं पास छात्र-छात्राओं को सीधे एडमिशन दे दिया गया।

काउंसिलिंग में शुरू से ही होता रहा विवाद
नर्सिंग की काउंसिलिंग शुरू से विवादों में रही। व्यापमं से प्री नर्सिंग टेस्ट का रिजल्ट निकला तो 40 व 50 परसेंटेज के हिसाब से केवल 228 छात्राएं ही बीएससी में एडमिशन के लिए पात्र थीं। इसके बाद इंडियन नर्सिंग काउंसिल को पत्र लिखकर परसेंटेज के बजाय परसेंटाइल से एडमिशन देने की अनुमति ली गई। अनुमति मिलने के बाद 31 अक्टूबर तक एडमिशन दिए गए। इसके बाद भी सैकड़ों की संख्या में सीटें खाली रह गईं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक ने मुख्यमंत्री से इन खाली सीटों पर 12वीं के आधार पर एडमिशन देने की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री ने इस मांग को नकार दिया, लेकिन बाद में राज्य सरकार इस मांग को मान गई।

एक साल में बढ़े 33 से ज्यादा निजी कॉलेज
पिछले एक साल में राज्य में 33 से ज्यादा निजी नर्सिंग कॉलेज बढ़ गए हैं। इसमें बीएससी नर्सिंग की सीटें 5 हजार से बढ़कर 7026 हो गई। जो नए कॉलेज खुले उनमें ही सबसे कम एडमिशन हुए हैं। जो पुराने कॉलेज वहां 80 से 90% एडमिशन पूरे हो गए। लगातार कॉलेज खुलने से सीटें खाली रह गई।

“निजी नर्सिंग कॉलेजों में जीराे परसेंटाइल से एडमिशन देने में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। इस वजह से सभी कॉलेजों की सूची का सत्यापन किया जा रहा है। जांच फरवरी के पहले हफ्ते से की जाएगी।”
-डॉ. देवप्रिय रथ, अध्यक्ष नर्सिंग काउंसिलिंग कमेटी