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उल्लेखनीय है कि, पन्ना जिले के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी एवं भ्रष्टाचार हावी है। यहां पंचायतों के निर्माण कार्य स्वीकृत होने के साथ ही कमीशन का खेल शुरू हो जाता है। निर्माण कार्य के बिल भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए पंचायतों के नुमाइंदों को सम्बंधित उपयंत्री एवं सहायक यंत्री को कार्य की लागत के हिसाब से मोटी रकम घूस/कमीशन के रूप में देनी पड़ती है। बताते चलें, निर्माण कार्यों में कमीशन रुपी रिश्वत को लेकर परेशान हो रहे पवई जनपद के आधा दर्जन सरपंचों ने कुछ समय पूर्व सहायक यंत्री के खिलाफ कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा था।जिसमें विस्तार पूर्वक यह बताया गया था कि निर्माण कार्य की राशि में कमीशन/रिश्वत ऐंठनें लिए उन्हें किस हद तक परेशान किया जा रहा है। सरपंचों के बेहद गंभीर आरोपों पर जिले के अधिकारियों के द्वारा क्या कार्यवाही की गई अब तक इसका पता नहीं चल सका। जिम्मेदारों के द्वारा भ्रष्टाचार/घूसखोरी के मामलों को लेकर जानबूझकर उदासीनता बरतने अथवा उसे नजरअंदाज करने का ही यह नतीजा है कि जिले के सरकारी कार्यालयों में बिना दाम, आम आदमी का कोई काम नहीं हो रहा है।